अष्ट महादान-online

अष्ट महादान

सनातन/हिन्दू धर्म में दान को बहुत ही महत्पूर्ण बताया गया है। हमारे धर्मग्रंथों में कई प्रकार के दान और उनका महत्व बताया गया है।

आप दस महादान एक साथ भी कर सकते हैं, और आप अलग-अलग (एक-एक कर के अपनी जरूरतों एंव मनोकामनाओं/इच्छाओं के अनुसार) भी कर सकते हैं। Read More

Price : Rs 8,400

 

दस महादान में शामिल वस्तुएं निम्नलिखित हैं :

  1. गाय/गौ दान

  2. भूमि दान

  3. तिल दान

  4. स्वर्ण (सोना) दान

  5. घी दान

  6. वस्त्र दान

  7. धन दान

  8. गुड़ दान

  9. चांदी दान

  10. नमक दान

    अग्नि पुराण के अनुसार दस श्रेष्ठ महादान में सोना, अश्व (घोड़ा), तिल, हाथी, रथ, भूमि, घर, वधु और गाय आदि शामिल हैं। वैसे पुरणों में महादान की संख्या सोलह गिनाई गई है। ये इस प्रकार हैं तुला पुरुष, मनुष्य के वजन के बराबर, सोना, चांदी का दान, हिरण्यगर्भ, ब्रह्मांड, कल्पवृक्ष, गोसहस्त्र, कामधेनु हिरण्याश्व रथ या केवल अश्व रथ, हेमहस्तिरथ या केवल हस्तरथ, पंचलांगल, घटादान, विश्वचक्र, कल्प लता, सप्सागर, रत्नधेनु और महाभूतघट।

    वेद, पुराणों के जमाने में किए जाने वाले ये दान अब ज्यादातर प्रचलन में नहीं है। पुराणों में अनेक दानों वर्णन किया गया है।इनमें गौ दान सबसे ज्यादा पुण्य देने वाला व महादानों में श्रेष्ठ माना जाता है। वैसे कहा गया है कि सब दानों में पहला दान तुला दान, उसके बाद हिरण्यगर्भ दान है। कल्पवृक्ष का दान भी महत्वपूर्ण है, इसके बाद हजार गायों के दान को पुप्य देने वाला माना गया है। सोने की गाय, सोने का घोड़ा, सोने के हाथी की गाडी, पांच हल से जोतने योग्य भूमि, बारह संसार चक्र कल्पवृक्ष, सात समुद्रों का दान, रत्न की गाय का दान, महाभूतों का दान और हाथियों का दान भी महत्वपूर्ण है।

    शास्त्रों में कहा गाया है कि भरत जैसे राजाओं ने ये दन किए थे। संसार में अपकर्मों औ पापों से छुटकारा पाने के लिए धनी व्यक्तियों को यह दान करना चाहिए। जीवन क्षणभंगुर है, लक्ष्मी चंचल है। वह हमशा किसी के पास नहीं रहती इसलिए धन होने पर दान करना ही उसकी शोभा है। महाराज रघु, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, सम्राट समुद्र गुप्त और शीलादित्य सम्रार हर्षवर्धन ने अनेक दान किए थे। सम्राट हर्षवर्धन हर पांचवें या छटे साल कुंभ मेले में जाते थे। वह बारी-बारी भगवान सूर्य, शिव और बुध का पूजन करते थे। पूजन के बाद ब्राह्मणों, आचार्यों, दीनों, बौद्ध संघ के तपस्वी भिक्षुओं को दान देते थे। इस दान के क्रम में वह लाए हुए अपने खजाने की सारी चीजें दान कर देते थे। वह अपने राजसी वस्त्र भी दान कर देते थे। फिर वह अपनी बहन राजश्री से कपडे माँग कर पहनते थे।

Online पूजा विवरण

  1. यह पूजा उन लोगों के लिये है, जो अपने या अपने परिवार के “खुशहाली, सौभाग्य, सुख-शांति,मनोकामना-पूर्ति एवं आदि”  के लिये पूजा-पाठ करना या करवाना चाहते तो हैं, पर उनके पास किसी कारण वश समय का अभाव है, या वो किसी कारण से तीर्थ पूजा स्थल पर पहुंचने में असमर्थ हैं

  2. ऐसे लोगों के लिये पौराणिक काल से हल/समाधान उपलब्ध है, जैसे पुराने समय में राजा-महाराजा किया करते थे, उनके नाम से उनके गुरु/पंडित जी पुरी पूजा पाठ और यज्ञ किया करते थे।और इस तरह पूजा करके उनको इस पूजा का समस्त लाभ मिलता था, इससे उनके धन की और समय की बचत होती थी।

  3. उसी की तर्ज़ पर हम सभी को सनातन धर्म से जोड़े रखने के लिये उन सभी लोगों के लिये यह प्रकिया द्वारा पूजा कराते हैं, जो सनातन धर्म से जुड़े तो रहना चाहते हैं पर उनके पास किसी कारण वश समय का अभाव है। या वो किसी कारण से तीर्थ पूजा स्थल पर पहुंचने में असमर्थ हैं।“यह पूजा भी उनके द्वारा की गई पूजा की तरह समस्त लाभ प्रदान करती है”।

  4.  इसमे पूजा करने वाले या जिसके लिये पूजा करनी है, उसके लिये निम्नलिखित जानकारीयां चाहिए होती हैं।

  • उस व्यक्ति का नाम

  • पिता का नाम

  • जन्मतिथि

  • जन्मस्थान

  • उद्देश्य (जिस उद्देश्य के लिये पूजा करनी
    है) Read More…

यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।

  • मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।

  • धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।

     

  • पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।

     

  • पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।

  • धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको “देवताओं का प्रवेश द्वार” कहते हैं।

  • हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”,”मोक्ष का द्वार”,”देवताओं का प्रवेश द्वार”,”हरि का द्वार”,आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है। इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।

 

दस महादान

  • यह मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त करने में मदद करता है।

  • गौ दान व्यक्ति को शुद्ध बनाने में मदद करता है और उसे अनंत आनंद की उच्चतम स्थिति प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसा कहा जाता है कि अनाज, पानी, कपड़े इत्यादि का दान करना या दुश्मनों को दोस्तों में बदलने के लिए एक जरूरतमंद व्यक्ति को उपहार के रूप में एक गाय भेंट करना। यह दान मृत्यु के बाद भी एक शांतिपूर्ण जीवन प्रदान करता है।

  • गाय का दान करने पर सूर्यलोक की प्राप्ति होती है।

  • गौ दान हमारे पाप कर्मों या पापों से छुटकारा पाने में मदद करता है।
    यह हमारे ऋणों को साफ करने में भी मदद करता है और माफी भी प्राप्त करता है।

  • पाप धेनु दान: पापों से छुटकारा पाने के लिए।

  • करज मुक्ति धेनु दान: ऋणों से मुक्ति के लिए।

  • मोक्ष धेनु दान: मोक्ष के लिए (आत्मज्ञान)।

  • प्रयास्तचित धेनु दान: क्षमा मांगने के लिए।

  • वैतरणी धेनु दान: मोक्ष (आत्मज्ञान) के लिए व्यक्ति के जीवन के अंतिम दिनों में गाय दान।

  • यह व्यक्ति को शुद्ध बनाने में मदद

  • करता है और उसे अनन्त आनंद की उच्चतम स्थिति प्राप्त करने में मदद करता है।

  • ऐसा कहा जाता है कि सूर्य, चंद्रमा, वरुण, अग्नि, ब्रह्मा, विष्णु, शिव उस व्यक्ति को प्रणाम करते हैं जो गाय का दान करता है।

भूमि दान

  • भूमि दान करने से उत्तम घर की प्राप्ति होती है।

तिल दान

  • कुंडली में शनि खराब अवस्था में हों या शनि की साढ़ेसाती या ढय्या चल रही हो तो किसी पवित्र नदी में हर शनिवार काले तिल प्रवाहित करें। इस उपाय से शनि के दोषों की शांति होती है।

  • तिल- जिस भी मनुष्य को संतान प्राप्ति की इच्छा हो, उसे तिल का दान करना चाहिए।

  • दुर्भाग्य दूर करता है काले तिल का दान और घर में खुशहाली लाता है।

स्वर्ण (सोना) दान

  • लंबी उम्र की इच्छा रखने वाले को सोने का दान देना चाहिए।

घी दान

  • हमेशा धन-सपंत्ति बनाए रखने के लिए घी का दान किया जाना चाहिए।

वस्त्र दान

  • चन्द्रलोक की प्राप्ति के लिए वस्त्रों का दान किया जाना चाहिए।

धन दान

  • धन दान करने से विभिन्न लाभ मिलते हैं, जो कि उसपर निर्भर करता कि आपने किस उदेश्य के लिए धन दान किया है।

गुड़ दान

  • धन-धान्य की प्राप्ति के लिए गुड़ का दान करना चाहिए।

चांदी दान

  • अच्छे रूप और सौंदर्य के लिए चांदी दान किया जाता है।

नमक दान

  • नमक का दान करने से दान करने वाले को कभी अन्न की कमी नहीं होती है।

आप दस महादान एक साथ भी कर सकते हैं, और आप अलग-अलग (एक-एक कर के अपनी जरूरतों एंव इच्छाओं के अनुसार) भी कर सकते हैं।

आप जैसे चाहें वैसे दान-पूजा कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिये आप हमसे फोन/ईमेल/चैट आदि के द्वारा सम्पर्क कर सकते हैं।

 
 
 
 

दस महादान-पूजा प्रक्रिया विवरण :-

  • पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 1 no.

  • पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 1 no.

इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवस्था और पवित्र प्रसाद में शामिल निम्नलिखित हैं :-

  • Online/LIVE कनैक्टिविटी एवं रिकॉर्डिंग के लिए इन्टरनेट, कैमरा एवं अन्य व्यवस्थायें।

  • आपके लिये Skype या अन्य माध्यम (आपके सुविधा अनुसार) के द्वारा “पूजा” की LIVE वीडियो टेलिकास्टिंग सीधे आप तक, जिसके द्वारा आप पंडित जी से और पंडित जी आपसे सीधे LIVE आमने-सामने संवाद/बात-चीत कर सकते हैं।

  • आप अकेले, परिवार या समूह के साथ पूजा के साक्षी हो कर अपने घर/ कार्यालय/ क्लब/ कन्वेंशन सेंटर/ आदि में भगवान की भक्ति का आंनद ले सकते हैं।

  • आप को रिकॉर्डिंग साझा करने के लिए पेन ड्राइव या अन्य माध्यम (आपके सुविधा अनुसार)।

  • “पूजा प्रसाद” आपके लिये आपके स्थान तक भेजा जायेगा।

  • अगर आप चाहें तो हम आपके स्थान तक आपको “हर-की-पौड़ी ब्रह्मकुंड” से पूजा द्वारा “अभिमंत्रित गंगाजल” भी प्रसाद के रूप में आपको भेज सकते हैं।

चैरिटी : Rs. 8,400 + दान की वस्तु का मूल्य/Couple/Head

  • पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 1100

  • दान-पूजा के लिये निम्नलिखित वस्तुओं का मूल्य : आप पर निर्भर है। (गाय, भूमि, तिल, स्वर्ण (सोना), घी, वस्त्र, धन,गुड़, चांदी, नमक)

  • पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100

  • पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 1100 (Optional)

  • इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवस्था और पवित्र प्रसाद : Rs. 5100
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