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बैसाखी पूजा – स्नान



ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से भी बैसाखी त्यौहार बहुत ही शुभ व मंगलकारी होता है क्योंकि इस दिन आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है इसलिये इस दिन बैसाख महीने की शुरुआत भी मानी जाती है वहीं सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने से इसे मेष सक्रांति भी कहा जाता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार लोगों के राशिफल पर इसका सकारात्मक व नकारात्मक रुप से प्रभाव पड़ता है। इसलिये अधिकतर हिंदू कलैंडर इस दिन को नये साल की शुरुआत मानते हैं इसे सौर नववर्ष भी कहा जाता है। मेष संक्राति के कारण पवर्तीय इलकों में मेलों के आयोजन होता है व देवी की पूजा की जाती है।
बैसाखी के समय आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है. विशाखा नक्षत्र पूर्णिमा में होने के कारण इस माह को बैसाखी कहते हैं। कुल मिलाकर, वैशाख माह के पहले दिन को बैसाखी कहा गया है। इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, इसलिए इसे मेष संक्रांति भी कहा जाता है।
Online पूजा विवरण
यह पूजा उन लोगों के लिये है, जो अपने या अपने परिवार के “खुशहाली, सौभाग्य, सुख-शांति,मनोकामना-पूर्ति एवं आदि” के लिये पूजा-पाठ करना या करवाना चाहते तो हैं, पर उनके पास किसी कारण वश समय का अभाव है, या वो किसी कारण से तीर्थ पूजा स्थल पर पहुंचने में असमर्थ हैं।
ऐसे लोगों के लिये पौराणिक काल से हल/समाधान उपलब्ध है, जैसे पुराने समय में राजा-महाराजा किया करते थे, उनके नाम से उनके गुरु/पंडित जी पुरी पूजा पाठ और यज्ञ किया करते थे।और इस तरह पूजा करके उनको इस पूजा का समस्त लाभ मिलता था, इससे उनके धन की और समय की बचत होती थी।
उसी की तर्ज़ पर हम सभी को सनातन धर्म से जोड़े रखने के लिये उन सभी लोगों के लिये यह प्रकिया द्वारा पूजा कराते हैं, जो सनातन धर्म से जुड़े तो रहना चाहते हैं पर उनके पास किसी कारण वश समय का अभाव है। या वो किसी कारण से तीर्थ पूजा स्थल पर पहुंचने में असमर्थ हैं।“यह पूजा भी उनके द्वारा की गई पूजा की तरह समस्त लाभ प्रदान करती है”।
इसमे पूजा करने वाले या जिसके लिये पूजा करनी है, उसके लिये निम्नलिखित जानकारीयां चाहिए होती हैं।
उस व्यक्ति का नाम
पिता का नाम
जन्मतिथि
जन्मस्थान
उद्देश्य (जिस उद्देश्य के लिये पूजा करनी
है) Read More…
यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।
मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।
धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।
पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।
पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।
धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको “देवताओं का प्रवेश द्वार” कहते हैं।
हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”,”मोक्ष का द्वार”,”देवताओं का प्रवेश द्वार”,”हरि का द्वार”,आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है। इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।
- शास्त्रों के अनुसार वैशाख संक्रांति के दिन गंगास्नान और दान का बड़ा महत्व है।
- मनुष्य को सौभाग्य प्राप्त होता है।
- हिन्दू/सनातन धर्म के लोग पारंपरिक रूप से गंगा जी स्नान करने को पवित्र मानते हैं, एंव माँ गंगा जी की संस्तुति करते हैं।
बैसाखी पूजा एवं स्नान प्रक्रिया विवरण :-
- पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 1 no.
- स्नान के लिये दिनों की कुल संख्या : 1 no.
- पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 1 no.
इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवस्था और पवित्र प्रसाद में शामिल निम्नलिखित हैं :-
- Online/LIVE कनैक्टिविटी एवं रिकॉर्डिंग के लिए इन्टरनेट, कैमरा एवं अन्य व्यवस्थायें।
- आपके लिये Skype या अन्य माध्यम (आपके सुविधा अनुसार) के द्वारा “पूजा” की LIVE वीडियो टेलिकास्टिंग सीधे आप तक, जिसके द्वारा आप पंडित जी से और पंडित जी आपसे सीधे LIVE आमने-सामने संवाद/बात-चीत कर सकते हैं।
- आप अकेले, परिवार या समूह के साथ पूजा के साक्षी हो कर अपने घर/ कार्यालय/ क्लब/ कन्वेंशन सेंटर/ आदि में भगवान की भक्ति का आंनद ले सकते हैं।
- आप को रिकॉर्डिंग साझा करने के लिए पेन ड्राइव या अन्य माध्यम (आपके सुविधा अनुसार)।
- “पूजा प्रसाद” आपके लिये आपके स्थान तक भेजा जायेगा।
- अगर आप चाहें तो हम आपके स्थान तक आपको “हर-की-पौड़ी ब्रह्मकुंड” से पूजा द्वारा “अभिमंत्रित गंगाजल” भी प्रसाद के रूप में आपको भेज सकते हैं।
चैरिटी : Rs. 8,400/Couple/Head
- पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 1100
- पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100
- पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 1100 (Optional)
- इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवस्था और पवित्र प्रसाद : Rs. 5100/दिन