बैल-दान

बैल दान

सनातन/हिन्दू धर्म में दान को बहुत ही महत्पूर्ण बताया गया है। हमारे धर्मग्रंथों में कई प्रकार के दान और उनका महत्व बताया गया है।

Price : Rs 3,300

शास्त्रों में कहा गाया है कि भरत जैसे राजाओं ने दान किए थे। संसार में अपकर्मों औ पापों से छुटकारा पाने के लिए धनी व्यक्तियों को यह दान करना चाहिए। जीवन क्षणभंगुर है, लक्ष्मी चंचल है। वह हमशा किसी के पास नहीं रहती इसलिए धन होने पर दान करना ही उसकी शोभा है। महाराज रघु, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, सम्राट समुद्र गुप्त और शीलादित्य सम्रार हर्षवर्धन ने अनेक दान किए थे।

सम्राट हर्षवर्धन हर पांचवें या छटे साल कुंभ मेले में जाते थे। वह बारी-बारी भगवान सूर्य, शिव और बुध का पूजन करते थे। पूजन के बाद ब्राह्मणों, आचार्यों, दीनों, बौद्ध संघ के तपस्वी भिक्षुओं को दान देते थे। इस दान के क्रम में वह लाए हुए अपने खजाने की सारी चीजें दान कर देते थे। वह अपने राजसी वस्त्र भी दान कर देते थे। फिर वह अपनी बहन राजश्री से कपडे माँग कर पहनते थे।

     

  •  बैल का दान करने पर सपंत्ति की प्राप्ति होती है।

 
 
 

बैल दान-पूजा प्रक्रिया विवरण :-

  •  पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 1 no.

  •  पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 1 no.

चैरिटी : Rs. 3,300 + दान की वस्तु का मूल्य/Couple/Head

  •  पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 1100

  •  दान-पूजा के लिये निम्नलिखित वस्तुओं का मूल्य : आप पर निर्भर है।                                                        (गाय, भूमि, तिल, स्वर्ण (सोना), घी, वस्त्र, धन,                                                                                           गुड़, चांदी, नमक)

  •  पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100

  •  पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 1100 (Optional)

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