गंगा-सप्तमी-स्नान

गंगा सप्तमी पूजा – स्नान

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां गंगा जी स्वर्ग लोक से भगवान शिवशंकर जी की जटाओं में पहुंची थी। इसलिए इस दिन इस पर्व के लिए गंगा जी मंदिरों सहित अन्य मंदिरों पर भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

Price : Rs 3,700

 
 

बैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में पहुंची थीं। इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है।

जिस दिन गंगा मां की उत्पत्ति हुई उस दिन को गंगा जयंती के रूप में मनाया जाता है और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर अवतरित हुईं वह दिन गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। गंगा सप्तमी के दिन गंगा नदी में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं। कहा जाता है कि गंगा नदी में स्नान करने से दस पापों का हरण होकर अंत में मुक्ति मिलती है।

यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।

  • मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।

  • धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।

  • पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।

  • पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।

  • धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको “देवताओं का प्रवेश द्वार” कहते हैं।

  • हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”,”मोक्ष का द्वार”,”देवताओं का प्रवेश द्वार”,”हरि का द्वार”,आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है। इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।

 

  • पुराणों में बताया गया है कि गंगा सप्तमी के दिन गंगा जी स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं।

  • मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • मनुष्य को दुखों से भी मुक्ति मिलती है।

गंगा सप्तमी पूजा एवं स्नान प्रक्रिया विवरण :-

  • पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 1 no.

  • स्नान के लिये दिनों की कुल संख्या : 1 no.

  • पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 1 no.

चैरिटी : Rs. 3,700/Couple/Head

  • पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 1500

  • पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100

  • पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 1100 (Optional)
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