श्री-यज्ञ-लक्ष्मी-यज्ञ

श्री लक्ष्मी यज्ञ

विष्णुप्रिया लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी मानी जाती है। जो भी श्रद्धा के साथ उनकी आराधना करता है उसे वे समृद्धि और वैभव प्रदान करती हैं । वे सफलता की भी देवी हैं । उनकी कृपा भक्तों पर सदैव बनी रहती है।

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अपने जीवन में धन के वर्षा कोन नहीं चाहता है। हर व्यक्ति की यही कामना होती है कि उस पर ताउम्र देवी लक्ष्मी जिन्हें हिंदू धर्म में धन की देवी का दर्जा प्राप्त है, की कृपा बनी रहे।
लेकिन अब केवल कामना करने से माँ का आशीर्वाद प्राप्त हो जाए ये भी तो मुमकिन नहीं है।
जी हाँ, पैसे कमाने के लिए जितना जरूरी है मेहनत करना। उतना ही जरूरी है मां लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना कर इन्हें प्रसन्न करना।

क्योंकि कहा जाता है जिस जातक पर इनकी कृपा नहीं होती वो अपने जीवन में चाहे जितनी भी मेहनत कर ले उसको धन-संपत्ति प्राप्त नहीं होती।

तो अगर आप भी अभी तक यही सोच रहे हैं कि आख़िर क्यों आपको आपकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा तो हो सकता है इसका कारण देवी लक्षमी का आप पर प्रसन्न न होना हो।

विष्णुप्रिया लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी मानी जाती है। जो भी श्रद्धा के साथ उनकी आराधना करता है उसे वे समृद्धि और वैभव प्रदान करती हैं । वे सफलता की भी देवी हैं । उनकी कृपा भक्तों पर सदैव बनी रहती है।

यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।

  • मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।

  • धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।

  • पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।

  • पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।

  • धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको “देवताओं का प्रवेश द्वार” कहते हैं।

  • हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”,”मोक्ष का द्वार”,”देवताओं का प्रवेश द्वार”,”हरि का द्वार”,आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है। इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।

 

  • यह यज्ञ धन प्राप्ति के लिए किया जाता है।

  • यह यज्ञ कमाई/आमदनी प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

  • इस यज्ञ से व्यक्ति सौभाग्यशाली हो जाता है।

श्री लक्ष्मी यज्ञ प्रक्रिया विवरण :-

  • यज्ञ के लिये दिनों की कुल संख्या : 9 no.

  • यज्ञ के लिये पंडितों की कुल संख्या : 11 no.

चैरिटी : Rs. 2,09,800/Couple/Head

  • यज्ञ के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 11000 (प्रथम दिन) + 500/पंडित/दिन

  • यज्ञ के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100/पंडित/दिन

  • यज्ञ के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 5100/दिन (Optional)
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