शिव महापुराण कथा/ शिव पुराण कथा-online

शिव महापुराण कथा/ शिव पुराण कथा

‘शिव पुराण’ का सम्बन्ध शैव मत से है। शिव पुराण में भगवान शंकर के बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। शिवमहापुराण में भगवान शिव और देवी पार्वती के बारे में और उनकी गाथा का विवरण पूर्ण रूप से दिया गया है।Read More

Price : Rs. 1,93,400 +Stage Cos.+Decoration

 

 

‘शिव पुराण’ का सम्बन्ध शैव मत से है। शिव पुराण में भगवान शंकर के बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। शिवमहापुराण में भगवान शिव और देवी पार्वती के बारे में और उनकी गाथा का विवरण पूर्ण रूप से दिया गया है।

शिवपुराण में शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। इसमें इन्हें पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन और भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान है।

शिव – जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं, सर्वोच्च सत्ता है, विश्व चेतना हैं और ब्रह्माण्डीय अस्तित्व के आधार हैं। सभी पुराणों में शिव पुराण को सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होने का दर्जा प्राप्त है। इसमें भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।

इस पुराण में प्रमुख रूप से शिव-भक्ति और शिव-महिमा का प्रचार-प्रसार किया गया है। प्राय: सभी पुराणों में शिव को त्याग, तपस्या, वात्सल्य तथा करुणा की मूर्ति बताया गया है। किन्तु ‘शिव पुराण’ में शिव के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके रहन-सहन, विवाह और उनके पुत्रों की उत्पत्ति के विषय में विशेष रूप से बताया गया है।

Online पूजा विवरण

  1. यह पूजा उन लोगों के लिये है, जो अपने या अपने परिवार के “खुशहाली, सौभाग्य, सुख-शांति,मनोकामना-पूर्ति एवं आदि”  के लिये पूजा-पाठ करना या करवाना चाहते तो हैं, पर उनके पास किसी कारण वश समय का अभाव है, या वो किसी कारण से तीर्थ पूजा स्थल पर पहुंचने में असमर्थ हैं

  2. ऐसे लोगों के लिये पौराणिक काल से हल/समाधान उपलब्ध है, जैसे पुराने समय में राजा-महाराजा किया करते थे, उनके नाम से उनके गुरु/पंडित जी पुरी पूजा पाठ और यज्ञ किया करते थे।और इस तरह पूजा करके उनको इस पूजा का समस्त लाभ मिलता था, इससे उनके धन की और समय की बचत होती थी।

  3. उसी की तर्ज़ पर हम सभी को सनातन धर्म से जोड़े रखने के लिये उन सभी लोगों के लिये यह प्रकिया द्वारा पूजा कराते हैं, जो सनातन धर्म से जुड़े तो रहना चाहते हैं पर उनके पास किसी कारण वश समय का अभाव है। या वो किसी कारण से तीर्थ पूजा स्थल पर पहुंचने में असमर्थ हैं।“यह पूजा भी उनके द्वारा की गई पूजा की तरह समस्त लाभ प्रदान करती है”।

  4.  इसमे पूजा करने वाले या जिसके लिये पूजा करनी है, उसके लिये निम्नलिखित जानकारीयां चाहिए होती हैं।

  • उस व्यक्ति का नाम

  • पिता का नाम

  • जन्मतिथि

  • जन्मस्थान

  • उद्देश्य (जिस उद्देश्य के लिये पूजा करनी
    है) Read More…

यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।

  • मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।

  • धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।

     

  • पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।

     

  • पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।

  • धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको “देवताओं का प्रवेश द्वार” कहते हैं।

  • हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”,”मोक्ष का द्वार”,”देवताओं का प्रवेश द्वार”,”हरि का द्वार”,आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है। इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।

 

  • जो व्यक्ति शिवपुराण को पढ़ता है या सुनता है, उसे भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।

  • अगर किसी व्यक्ति से अनजाने या जान-बूझकर कोई पाप हो जाए तो अगर वो शिवपुराण को पढ़ता या सुनता है तो उसे घोर से घोर पाप से छुटकारा मिल जाता है।

  • जो व्यक्ति शिवपुराण को पढ़ता या सुनता है, उनके मृत्यु के बाद शिव के गण लेने आते हैं।

  • सावन में शिव पुराण का पाठ करने से उसका फल बहुत ही सुखदायी होता है।

  • जिन महिलाओं की शादी नहीं हो पा रही, उन्हें भी इसका पाठ करने से अपना इच्छित वर पाने में मदद मिलती है।

  • सावन के सोमवार इतने शुभ माने जाते हैं कि इस दौरान महिलाओं की पूजा-अर्चना से उनके पति का दुर्भाग्य भी सौभाग्य में परिवर्तित हो जाता है। इस दौरान श्री शिवमहापुराण पढ़ने और सुनने का विशेष फल मिलता है।

शिव महापुराण कथा पाठ-पूजा प्रक्रिया विवरण :-

  • पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 9 no.

  • पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 5 no.

इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवस्था और पवित्र प्रसाद में शामिल निम्नलिखित हैं :-

  • Online/LIVE कनैक्टिविटी एवं रिकॉर्डिंग के लिए इन्टरनेट, कैमरा एवं अन्य व्यवस्थायें।

  • आपके लिये Skype या अन्य माध्यम (आपके सुविधा अनुसार) के द्वारा “पूजा” की LIVE वीडियो टेलिकास्टिंग सीधे आप तक, जिसके द्वारा आप पंडित जी से और पंडित जी आपसे सीधे LIVE आमने-सामने संवाद/बात-चीत कर सकते हैं।

  • आप अकेले, परिवार या समूह के साथ पूजा के साक्षी हो कर अपने घर/ कार्यालय/ क्लब/ कन्वेंशन सेंटर/ आदि में भगवान की भक्ति का आंनद ले सकते हैं।

  • आप को रिकॉर्डिंग साझा करने के लिए पेन ड्राइव या अन्य माध्यम (आपके सुविधा अनुसार)।

  • “पूजा प्रसाद” आपके लिये आपके स्थान तक भेजा जायेगा।

  • अगर आप चाहें तो हम आपके स्थान तक आपको “हर-की-पौड़ी ब्रह्मकुंड” से पूजा द्वारा “अभिमंत्रित गंगाजल” भी प्रसाद के रूप में आपको भेज सकते हैं।

चैरिटी : Rs. 1,93,400 + मंच लागत + सजावट

  • पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 5100 (प्रथम दिन) + 500/पंडित/दिन

    पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100/पंडित/दिन

    व्यास/ कथा वाचक को दक्षिणा : Rs. 3000/दिन

    इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवस्था और पवित्र प्रसाद : Rs. 5100/दिन

    पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला/हॉल/टेंट : Rs. 1100/दिन (Optional) के लिये दान

    पाठ के लिये मूर्ति स्थापना एवं मंच निर्माण : Rs. 500 से Rs. 11000 /दिन (Optional)

    पाठ के लिये सजावट : Rs. 500 से Rs. 11000 /दिन (Optional)
0
    0
    Your Cart
    Your cart is emptyReturn to Shop
    Scroll to Top