माघ-शुक्ल-पक्ष-पूजा

माघ शुक्ल पक्ष पूजा

हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार माघ माह के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी तिथि भगवान विष्‍णु की पूजा के लिए समर्पित है।

Price : Rs 24,900

 
 

हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार माघ माह के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी तिथि भगवान विष्‍णु की पूजा के लिए समर्पित है। इसे “जया एकादशी” कहा जाता है। इस तिथि को दया, प्रेम और सुख हासिल करने के लिए महत्‍वपूर्ण माना गया है।

इंद्र के क्रोध और गंधर्व युगल के प्रेम से इस तिथि का गहरा संबंध है। मान्‍यता है कि इस तिथि को भगवान विष्‍णु स्‍वयं पृथ्‍वी पर आते हैं और सही विधि नियम और मुहूर्त में जो भी भक्‍त उनके लिए भोजन त्‍यागकर पूजा करता है उसे वह मनवांछित फल देते हैं।

पौराणिक कथा और गंधर्व प्रेम

नृत्‍य और विहार के लिए अन्‍य देवताओं के साथ इंद्रदेव नंदन वन पहुंचे तो उनका स्‍वागत अप्‍सराओं और गंधर्वों ने किया। अप्‍सराओं के साथ गंधर्वों ने नृत्‍य पेश किया। एक दूसरे के प्रेम में डूबे गंधर्व युगल पुष्‍पवती और माल्‍यवान भी इंद्रदेव के समक्ष नृत्‍य पेश कर रहे थे। दोनों के बीच परस्‍पर प्रेम के चलते वह सही सुर और ताल नहीं मिला पा रहे थे। इससे नाराज होकर इंद्र ने दोनों को पिशाच बनाकर हिमालय भेज दिया। वर्षों तपस्‍या से खुश होकर भगवान विष्‍णु ने दोनों को श्राप मुक्‍त कर वापस गंधर्व बना दिया।

इंद्रदेव के क्रोध का शिकार हुए प्रेम में डूबे माल्‍यवान और पुष्‍पवती को भगवान विष्‍णु ने जिस तिथि को सभी कष्‍टों, पापों से मुक्‍त कर सुख और प्रेम का वरदान दिया वह माघ माह के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी थी। भगवान विष्‍णु ने दोनों से कहा कि इस तिथि को जया एकादशी के नाम से जाना जाएगा और जो भी शुभ मुहूर्त के दौरान मेरी आराधना करेगा उसे स्‍वर्ग लोक में रहने और सुख समृद्धि हासिल होगी। उसके परिवार के सभी दुख, कष्‍ट और पाप मिट जाएंगे। इसीलिए जया एकादशी पर विष्‍णु पूजा का विधान है।

यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।

  • मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।

  • धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।

  • पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।

  • पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।

  • धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको “देवताओं का प्रवेश द्वार” कहते हैं।

  • हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”,”मोक्ष का द्वार”,”देवताओं का प्रवेश द्वार”,”हरि का द्वार”,आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है। इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।

 

  • मृत्यु के बाद स्वर्ग लोक की प्राप्ति।

  • सुख-समृद्धि की प्राप्ति।

  • सभी दुख, कष्ट एवं पापों से मुक्ति।

माघ शुक्ल पक्ष पूजा प्रक्रिया विवरण :-

  • पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 9 no.

  • पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 9 no.

चैरिटी : Rs. 24,900/Couple/Head

  • पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 1100 (प्रथम दिन) + 500/दिन

  • पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100/पंडित/दिन

  • पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 1100/दिन (Optional)
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