त्रिपिंडी श्राद्ध – पूजा




Price :Rs 6,500
पितृ दोष का सबसे सामान्य कारण आपके अपने घर या ननिहाल में आपके जन्म से पूर्व किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हो जाती है और उसका दाह – संस्कार उचित तरीके से नहीं किया गया होता है तो ऐसी स्थिति में यह दोष उत्पन्न होता है। इसके अलावा यदि किसी कि भूमि या संपत्ति पर आपने बल पूर्वक अधिकार किया हो , जाने – अनजाने आपके पूर्वजों ने किसी की हत्या की हो या किसी को इतना सताया हो कि उस दुःख के कारण उसकी मृत्यु हो गयी हो तो आने वाली पीढ़ी में पितृ दोष स्वतः उत्पन्न हो जाता है। पितृ दोष अत्यंत ही हानिकारक होता है क्योंकि यह उस व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को धीरे-धीरे दीमक की तरह नुकसान पहुंचता है।
त्रिपिंडी श्राद्ध एक काम्य श्राद्ध है। जब कभी लगातार किसी कारण से पितरों का श्रद्धा लगातार तीन या उससे अधिक साल तक छूट जाता है तब पितरों के अंदर प्रेतत्व वाश करने लगता है, जिसे दूर करने के लिए ये श्राद्ध किया जाता है।
प्रेत योनियां तीन तरह की होती हैं, जिसे हमारे शास्त्रों में विभिन्न तरीकों से बताया गया है। यदि कोई प्रेत पृथ्वी पे वाश करते हैं तो इसे तमोगुणी कहा जाता है, अंतरिक्ष में स्थित पिशाच को रजोगुणी और वायुमंडल में स्थित प्रेत को सत्तोगुणी कहा जाता है। और इन तीनों के पीड़ा को कम करने के लिए जो निवारण किया जाता है उसे त्रिपिंडी श्राद्ध कहा जाता है।
- संतान की प्राप्ति हेतु।
- बुरी नजरों से बचाव हेतु और यदि गौ हत्या का दोष है तो उसके निदान हेतु।
- धन हानि से निदान।
- अनावश्यक विवाद से निदान।
- परिवार में क्लेश से निदान।
- शुभ कार्यों में विलम्ब से निदान।
- अचानक दुर्घटना का योग से निदान।
- नौकरी-व्यापार में असफलता से निदान।
त्रिपिंडी श्राद्ध-पूजा प्रक्रिया विवरण :-
- पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 1 no.
- पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 3 no.
चैरिटी : Rs. 6,500/Couple/Head
- पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 2100
- पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100/पंडित
- पूजा के लिये एक दिन का पूजा-स्थल/ यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 1100/दिन (Optional)