कोटि चंडी यज्ञ
दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए जिस यज्ञ विधि को पूर्ण किया जाता है उसे कोटि चंडी यज्ञ कहा जाता है।
इस यज्ञ में 1,00,000 (1 करोड़) पाठ करने होते हैं reoad More
माँ दुर्गा को शक्ति की देवी कहा जाता है। दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए जिस यज्ञ विधि को पूर्ण किया जाता है उसे शत चंडी यज्ञ बोला जाता है। नवचंडी यज्ञ को सनातन धर्म में बेहद शक्तिशाली वर्णित किया गया है। इस यज्ञ से बिगड़े हुए ग्रहों की स्थिति को सही किया जा सकता है।
और सौभाग्य इस विधि चंडी यज्ञ के बाद आपका साथ देने लगता है। इस यज्ञ के बाद मनुष्य खुद को एक आनंदित वातावरण में महसूस कर सकता है।
और सौभाग्य इस विधि चंडी यज्ञ के बाद आपका साथ देने लगता है। इस यज्ञ के बाद मनुष्य खुद को एक आनंदित वातावरण में महसूस कर सकता है।
यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।
- मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।
- धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।
- पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।
- पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।
- धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको“देवताका प्रवेश द्वार”ओं कहते हैं।
- हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”, “मोक्ष का द्वार”, “देवताओं का प्रवेश द्वार” , “हरि का द्वार”, आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है।इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।
- चंडी यज्ञ करने से मनुष्य का सौभाग्य उसका साथ देनें लग जाता है।
- यह यज्ञ एक असाधारण, बेहद शक्तिशाली और बड़ा यज्ञ है जिससे देवी माँ की अपार कृपा होती है।
- सनातन इतिहास में कई जगह ऐसा आता है कि पुराने समय में देवता और राक्षस इस यज्ञ का प्रयोग ताकत और उर्जावान होने के लिये निरंतर करते थे।
- दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए जिस यज्ञ विधि को पूर्ण किया जाता है उसे चंडी यज्ञ बोला जाता है।
- चंडी यज्ञ को सनातन धर्म में बेहद शक्तिशाली वर्णित किया गया है।
- इस यज्ञ से बिगड़े हुए ग्रहो की स्तिथि को सही किया जा सकता है।
- वेदों में इसकी महिमा के बारे में यहाँ तक बोला गया है कि चंडी यज्ञ के बाद आपके दुश्मन आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं।
- इस यज्ञ को गणेश जी, भगवान शिव जी, नव ग्रह और नव दुर्गा (देवी) को समर्पित करने से मनुष्य का जीवन धन्य होता है।
- तुरंत फलदायी है।
- मनोकामना पूर्ण हेतु।
- तुरंत फलदायी है।
- संतान प्राप्ति के लिए।
- न्यायालय संबधित विजय के लिए।
- रोग मुक्ति के लिए (ला-इलाज)।
- कार्य पर विजय प्राप्त हेतु।
- धन-आगमन के लिए व धन संचय करने के लिए।
- प्रेत बाधा हटाने के लिए।
कोटि चंडी यज्ञ प्रक्रिया विवरण :-
- यज्ञ की कुल संख्या : 1,00,00,000 no.
- पाठ की कुल संख्या : 1,00,00,000 no.
- पूजा की कुल संख्या : 1,00,00,000 no.
- एक दिन में पंडितों द्वारा कि जाने वाले पूजा + पाठ + यज्ञ की कुल संख्या : 2 no. (प्रत्येक)
- चंडी यज्ञ के लिये दिनों की कुल संख्या : 240 no.
- यज्ञ के लिये पंडितों की कुल संख्या : 21,000 no.
इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवस्था और पवित्र प्रसाद में शामिल निम्नलिखित हैं :-
- यह यज्ञ बहुत-बहुत ही अधिक महत्वपूर्ण और अलौकिक है। और इस यज्ञ का खर्चा बहुत अधिक (करोड़ों में) है। और इसको सुनियोजित करने के लिए बहुत से ज्ञानी लोगों को बहुत मेहनत करनी पड़ती है।
- अत: कार्य को प्रारम्भ करने से पहले आपको अपनी प्रामाणिकता के लिए हमारे धार्मिक ट्रस्ट “उमा महेश्वर सेवा ट्रस्ट” में आपको 1.1,00,000 रूपए दान करने होंगें जो कि बाद में आपके यज्ञ कि राशि में समायोजित हो जायेंगें।
- आपके द्वारा 1,00,000 रूपए दान करने के बाद, हमारी टीम आपसे खुद संपर्क करके सम्पूर्ण बात करेगी और आगे के लिए शुरुआत करेगी।
- ॐ नमोः नारायण




