गंगा दशहरा पूजा – स्नान

गंगा दशहरा पूजा – स्नान

गंगा दशहरा देवी गंगा जी को समर्पित है, जो इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुईं। भगीरथ के पूर्वजों की शापित आत्माओं को शुद्ध करने के लिए देवी गंगा जी पृथ्वी पर अवतरित हुईं।

Price : Rs 3,700

 
 

हरिद्वार में कुंभ की तर्ज पर गंगा दशहरा आयोजित किया जाता है।

गंगा दशहरा देवी गंगा जी को समर्पित है, जो इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुईं। भगीरथ के पूर्वजों की शापित आत्माओं को शुद्ध करने के लिए गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं। पृथ्वी पर आने से पहले, देवी गंगा जी भगवान ब्रह्मा के कमंडल में निवास कर रही थीं। ऐसा कहा जाता है कि वह स्वर्ग की पवित्रता को अपने साथ पृथ्वी पर ले आई, जिससे यह एक पवित्र स्थान बन गया।

इस दिन गंगा स्नान करना काफी फलदायी माना जाता है। इसी के साथ दान पुण्य के कार्यों के लिए भी ये दिन महत्वपूर्ण माना गया है। हिंदू धर्म में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी माना गया है। कहा जाता है कि इसमें आस्था की डुबकी लगाकर व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

शास्त्रों के अनुसार जिस दिन पापनाशिनी, मोक्षप्रदायिनी, सरितश्रेष्ठा एवं पुण्यसलिला मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ वह दिन ‘गंगा दशहरा'(ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) के नाम से जाना जाता है। विष्णुपदी गंगा मैया के धरती लोक पर आने का पर्व गंगा दशहरा हर साल मनाया जाता है। कहा गया है-‘गंगे तव दर्शनात मुक्तिः’ अर्थात निष्कपट भाव से गंगाजी के दर्शन मात्र से जीवों को कष्टों से मुक्ति मिलती है। वहीं गंगाजल के स्पर्श से स्वर्ग की प्राप्ति होती है। पाठ, यज्ञ, मंत्र ,होम और देवार्चन आदि समस्त शुभ कर्मों से भी जीव को वह गति नहीं मिलती,जो गंगाजल के सेवन से प्राप्त होती है।

यह सेवा सिर्फ “धर्मनगरी-हरिद्वार” में उपलब्ध है।

  • मोक्षप्रदा पतित-पावनी माँ श्री गंगा जी की धरती व देवभूमि के द्वार हरिद्वार की पावन धरा पर हम आपको पूजा-पाठ, दान-पुण्य एवं तीर्थयात्रा करने की समस्त सुविधाएं व सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।

  • धर्मनगरी हरिद्वार में किये गये पूजा-पाठ, दान-पुण्य का सर्वाधिक और अलौकिक लाभ व्यक्ति को मिलता है।

  • पुराणों और शास्त्रों के अनुसार धर्मनगरी हरिद्वार को ही पूजा-पाठ, दान-पुण्य करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ, महत्वपूर्ण, उत्तम एवं उपयुक्त तीर्थ-स्थान माना गया है, एवं चारधाम तीर्थयात्रा तो होती ही शुरू “धर्मनगरी हरिद्वार” से है।

  • पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हरिद्वार जा के गंगा स्नान कर पूजा-पाठ व दान पुण्य करना चाहिये, क्योंकि इससे व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।

  • धर्मनगरी हरिद्वार भगवान शिव जी, भगवान विष्णु जी और माँ श्री गंगा जी की भूमि है, इसलिये इसको “देवताओं का प्रवेश द्वार” कहते हैं।

  • हरिद्वार को “धर्मनगरी”,”माँ श्री गंगा जी की धरती”,”कुम्भ-नगरी”,”देवनगरी”,”मोक्ष का द्वार”,”देवताओं का प्रवेश द्वार”,”हरि का द्वार”,आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान शंकर जी की ससुराल “कनखल” भी हरिद्वार में ही है। इसलिये हरिद्वार को विश्व की “आध्यात्मिक राजधानी” कहा जाता है।

 

  • इस दिन गंगा में स्नान, अन्न-वस्त्रादि का दान, जप-तप-उपासना और उपवास किया जाय तो दस प्रकार के पाप (3 प्रकार के कायिक, चार प्रकार के वाचिक और तीन प्रकार के मानसिक) दूर होते हैं।

  • ‘गंगे तव दर्शनात मुक्तिः’ अर्थात निष्कपट भाव से गंगाजी के दर्शन मात्र से जीवों को कष्टों से मुक्ति मिलती है।

  • गंगाजल के स्पर्श से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

गंगा दशहरा पूजा एवं स्नान प्रक्रिया विवरण :-

  • पूजा के लिये दिनों की कुल संख्या : 1 no.

  • स्नान के लिये दिनों की कुल संख्या : 1 no.

  • पूजा के लिये पंडितों की कुल संख्या : 1 no.

चैरिटी : Rs. 3,700/Couple/Head

  • पूजा के लिये समस्त पूजन सामग्री : Rs. 1500

  • पूजा के लिये प्रत्येक पंडित को दक्षिणा : Rs. 1100

  • पूजा के लिये एक दिन का यज्ञशाला के लिये दान : Rs. 1100 (Optional)
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